North Korea Fires Ballistic Missiles
14 मार्च 2026 (शनिवार) को North Korea ने प्योंगयांग के पास सुनान क्षेत्र से लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार ये मिसाइलें करीब 350 किलोमीटर तक उड़ान भरने के बाद Sea of Japan (जिसे ईस्ट सी भी कहा जाता है) में गिरीं। राहत की बात यह रही कि ये मिसाइलें Japan के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) के बाहर गिरीं, इसलिए जापान पर कोई सीधा खतरा या हमला नहीं हुआ। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी और कई देशों ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

North Korea Attack
- दक्षिण कोरिया के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मिसाइलें प्योंगयांग के पास स्थित सुनान इलाके से दागी गईं। यह स्थान उत्तर कोरिया की राजधानी के नजदीक है और यहां से पहले भी मिसाइल परीक्षण किए जा चुके हैं। मिसाइलों के प्रक्षेपण के बाद दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत स्थिति की निगरानी शुरू कर दी। क्षेत्र में तैनात रडार सिस्टम और रक्षा तंत्र को अलर्ट पर रखा गया ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल परीक्षण उस समय हुआ जब **United States और South Korea के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। इस अभ्यास का नाम Freedom Shield है, जो 10 मार्च से 19 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास हर साल किया जाता है और इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और रक्षा क्षमता को मजबूत करना होता है। हालांकि उत्तर कोरिया लंबे समय से इन सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। उसका कहना है कि ये अभ्यास वास्तव में उस पर संभावित हमले की तैयारी हैं।
- इसी कारण कई विश्लेषक इस मिसाइल परीक्षण को उत्तर कोरिया द्वारा किया गया शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं। यह एक तरह से यह दिखाने की कोशिश हो सकती है कि वह अपनी सैन्य क्षमता और मिसाइल तकनीक को लगातार मजबूत कर रहा है और किसी भी परिस्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है।
- मिसाइल परीक्षण से पहले उत्तर कोरिया के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी सख्त बयान आया था। देश के नेता Kim Jong Un की बहन Kim Yo Jong ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन सैन्य अभ्यासों को जारी रखते हैं, तो इसके “अकल्पनीय और भयानक परिणाम” हो सकते हैं। उनके इस बयान को कई विशेषज्ञों ने संभावित मिसाइल परीक्षण का संकेत माना था।
- मिसाइलों के दागे जाने के बाद दक्षिण कोरिया सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने एक आपात बैठक बुलाई और स्थिति का आकलन किया। दक्षिण कोरिया ने इस कार्रवाई को “उकसावे वाली हरकत” बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों का उल्लंघन है, जिनमें उत्तर कोरिया को बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण करने से रोका गया है।
- वहीं जापान ने भी इस घटना पर कड़ी नजर रखी। जापान की सरकार ने पुष्टि की कि मिसाइलें उसके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन के बाहर गिरीं, इसलिए देश की सुरक्षा को कोई सीधा खतरा नहीं हुआ। फिर भी जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे इस घटना की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सतर्क हैं।
- इस बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सैन्य एजेंसियां मिलकर इन मिसाइलों के तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण कर रही हैं। विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि मिसाइलों का प्रकार क्या था, उनकी सटीक क्षमता कितनी है और क्या उनमें कोई नई तकनीक इस्तेमाल की गई थी। ऐसे विश्लेषण से यह समझने में मदद मिलती है कि उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल तकनीक को किस दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
- यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 2026 में यह उत्तर कोरिया का तीसरा बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है। इससे पहले भी इस साल उसने मिसाइलों का परीक्षण किया था, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं। बार-बार हो रहे इन परीक्षणों के कारण पूर्वी एशिया में तनाव का माहौल बना हुआ है।
- कुल मिलाकर यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कोरियाई प्रायद्वीप और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति कितनी संवेदनशील है। जहां एक ओर अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य तैयारी को मजबूत करने के लिए संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं, वहीं उत्तर कोरिया इसे अपने खिलाफ खतरा मानकर जवाबी कदम उठा रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि आगे की स्थिति किस दिशा में जाती है और क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव को कम किया जा सकता है।
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